एक आध्यात्मिक समर्पण की अद्वितीय गाथा: हिन्दू धर्म में भक्ति का स्वरूप अत्यंत व्यापक और गूढ़ है। भक्ति वह दिव्य अनुभूति है, जो ईश्वर और भक्त के मध्य एक अविच्छिन्न बंधन स्थापित करती है। इस भक्ति की धारा में अनेक संतों, महापुरुषों एवं कवियों ने अपना जीवन समर्पित किया है, किंतु श्रीकृष्ण के प्रति अनुराग और आत्मसमर्पण के दृष्टिकोण से मीराबाई का योगदान सर्वोपरि माना जाता है। मीराबाई की कृष्ण-भक्ति केवल प्रेम का चरमोत्कर्ष नहीं थी, बल्कि यह एक आध्यात्मिक विद्रोह, आत्मा का परमात्मा में लय, और सांसारिक बंधनों से मुक्त होने की अनुपम यात्रा भी थी। श्रीकृष्ण: भक्ति के सार्वभौमिक आराध्य: भगवान श्रीकृष्ण भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में एक अत्यंत विलक्षण व्यक्तित्व हैं। वे एक महान योगेश्वर, दार्शनिक, राजनीतिज्ञ, प्रेममूर्ति और भक्तवत्सल भगवान हैं। गीता में कृष्ण ने अर्जुन को कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्ति योग की शिक्षा दी, लेकिन स्वयं भक्तों के लिए प्रेम और समर्पण के साकार रूप बन गए। राधा-कृष्ण का दिव्य प्रेम हो, सुदामा के प्रति उनकी मित्रता हो, अथवा गोकुल और वृंदावन के...