आज हम प्रभु श्री राम के महान भक्त परमपूज्य श्री हनुमानजी कि जन्म कथा एवं उनका प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य भक्ति का यथासंभव अपनी योग्यतानुसार वर्णन करने कि कोशिश कर रहा हूँ जिसे हमने चार अध्यायों में विभाजित किया है ,जो इसप्रकार है :- अध्याय 1: दिव्य उत्पत्ति — अंजना और केसरी का तप तथा वायुदेव का वरदान 1.1 अंजना का शाप और उसकी मुक्ति की प्रतिज्ञा प्राचीन काल में स्वर्गलोक की एक परम सुंदरी अप्सरा, पुंजिकस्थला, अपने सौंदर्य और चंचलता के कारण विख्यात थी। एक दिन उन्होंने ध्यानमग्न एक ऋषि का उपहास कर दिया। ऋषि ने उन्हें शाप दिया कि उन्हें वानरी योनि में जन्म लेना होगा। पुंजिकस्थला ने क्षमा याचना की, तब ऋषि ने कहा -"जब तुम तप कर एक ऐसे पुत्र को जन्म दोगी जो जगत का उद्धार करेगा, तभी इस शाप से मुक्ति मिलेगी।" यह शाप केवल दंड नहीं था; यह एक दिव्य लीला की भूमिका थी। ब्रह्मांड की चेतना जानती थी कि आनेवाले समय में धर्म के पुनर्स्थापन हेतु एक ऐसे वीर की आवश्यकता होगी जो अतुलनीय शक्ति, भक्ति और बुद्धि से युक्त हो। 1.2 वानरराज केसरी और अंजना का तप वानरराज केसरी, जो पर्वतराज सुमेरु के समीप...