पिछले भाग के अंश: पिछले भाग में हम सबने टेलीपैथी क्या है, कितने प्रकार के होते हैं, क्या महत्व है आदि कि जानकारी प्राप्त किया, अब उसके अगले भाग में चलते हैं और कुछ नया सीखने कि कोशिश करते हैं। 1 . टेलीपैथी का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य टेलीपैथी कोई नया या आधुनिक विचार नहीं है। इसके प्रमाण हमें प्राचीन सभ्यताओं और ग्रंथों में भी मिलते हैं। वैदिक काल, मिस्र, चीन और यूनानी दर्शन में ऐसे अनेक उल्लेख मिलते हैं, जहाँ मुनियों, संतों या साधकों द्वारा विचारों के आदान-प्रदान की क्षमता का वर्णन है। a. भारत में टेलीपैथी का इतिहास: ऋषि-मुनियों के काल में टेलीपैथी को 'संकेत भाषा' या 'मनसंवाद' के रूप में जाना जाता था। महाभारत में विदुर, संजय और वेदव्यास जैसे पात्रों में ऐसी क्षमताएँ दर्शाई गई हैं। संजय ने धृतराष्ट्र को युद्ध का आँखों-देखा हाल सुनाया, वह भी मीलों दूर से — यह टेलीपैथी का ही उदाहरण माना जाता है। b. अन्य संस्कृतियों में: मिस्र की पिरामिड सभ्यता में ‘आकाशीय संवाद’ का उल्लेख है। ताओ धर्म, बौद्ध परंपरा और ईसा मसीह के समय के कुछ चमत्कारी घटनाओं को भी टेलीपैथी से जोड़ा गया है। 2. ध...