भगवान दिव्यानंद के 108 पवित्र नाम (दिव्यानंद अष्टोत्तर शतनामावली-सभी नामों के साथ संक्षिप्त अर्थ)
1. ॐ दिव्यानंदाय नमः – जो दिव्य आनंद के स्वरूप हैं।
2. ॐ परमात्मने नमः – जो समस्त ब्रह्मांड के आत्मा हैं।
3. ॐ विश्वकर्मणे नमः – जो सृष्टि के रचयिता हैं।
4. ॐ सत्यरूपाय नमः – जो सत्य स्वरूप हैं।
5. ॐ शाश्वताय नमः – जो शाश्वत (नित्य) हैं।
6. ॐ ज्ञानमयाय नमः – जो पूर्ण ज्ञान से ओत-प्रोत हैं।
7. ॐ प्रकाशात्मने नमः – जो प्रकाश का स्रोत हैं।
8. ॐ करुणामयाय नमः – जो करुणा से परिपूर्ण हैं।
9. ॐ शरणागतवत्सलाय नमः – जो शरण में आए भक्तों पर विशेष कृपा करते हैं।
10. ॐ भक्तपालकाय नमः – जो अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।
11. ॐ दीनबंधवे नमः – जो दीन-दुखियों के सहायक हैं।
12. ॐ त्रैलोक्यनाथाय नमः – जो तीनों लोकों के स्वामी हैं।
13. ॐ सर्वेश्वराय नमः – जो समस्त संसार के ईश्वर हैं।
14. ॐ संतोषदाय नमः – जो संतोष प्रदान करने वाले हैं।
15. ॐ मनोहराय नमः – जो मन को हर लेने वाले हैं।
16. ॐ सर्वव्यापिने नमः – जो संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त हैं।
17. ॐ अद्वितीयाय नमः – जो अद्वितीय (बेजोड़) हैं।
18. ॐ महाप्रकाशाय नमः – जो महान प्रकाश के स्रोत हैं।
19. ॐ अनंतविक्रमाय नमः – जिनका पराक्रम अनंत है।
20. ॐ शरण्याय नमः – जो शरणागत को अपनाने वाले हैं।
21. ॐ चैतन्यमयाय नमः – जो शुद्ध चेतना के स्वरूप हैं।
22. ॐ सर्वसिद्धिदाय नमः – जो समस्त सिद्धियाँ प्रदान करने वाले हैं।
23. ॐ योगेश्वराय नमः – जो योग के स्वामी हैं।
24. ॐ मोक्षदायकाय नमः – जो मोक्ष प्रदान करने वाले हैं।
25. ॐ सुखसागराय नमः – जो सुख के अथाह सागर हैं।
26. ॐ शांति प्रदाय नमः – जो शांति प्रदान करने वाले हैं।
27. ॐ तपस्विने नमः – जो महान तपस्वी हैं।
28. ॐ आरोग्यकराय नमः – जो आरोग्य (स्वास्थ्य) प्रदान करते हैं।
29. ॐ आदिपुरुषाय नमः – जो आदिकाल के पुरुष हैं।
30. ॐ सर्वशक्तिमयाय नमः – जो समस्त शक्तियों के स्वामी हैं।
31. ॐ दयामयाय नमः – जो दया के सागर हैं।
32. ॐ तेजस्विने नमः – जिनकी आभा अत्यंत तेजस्वी है।
33. ॐ धर्मसंस्थापकाय नमः – जो धर्म की स्थापना करने वाले हैं।
34. ॐ अजेयाय नमः – जो कभी पराजित नहीं होते।
35. ॐ सर्वकामदाय नमः – जो समस्त इच्छाएँ पूर्ण करने वाले हैं।
36. ॐ योगनायकाय नमः – जो योगियों के नायक हैं।
37. ॐ भक्तवत्सलाय नमः – जो भक्तों पर स्नेह रखते हैं।
38. ॐ ब्रह्मस्वरूपाय नमः – जो ब्रह्म के स्वरूप हैं।
39. ॐ अद्भुतरूपाय नमः – जिनका रूप अद्भुत है।
40. ॐ अनवरतप्रेरकाय नमः – जो निरंतर प्रेरणा प्रदान करते हैं।
41. ॐ सर्वाधिष्ठानाय नमः – जो सभी के आधार हैं।
42. ॐ भक्तसंकल्पसिद्धिदायकाय नमः – जो भक्तों के संकल्प को सिद्ध करते हैं।
43. ॐ सत्यसंधाय नमः – जो सत्य के लिए संकल्पित रहते हैं।
44. ॐ लोकपालकाय नमः – जो संसार के रक्षक हैं।
45. ॐ कालातीताय नमः – जो काल के बंधन से परे हैं।
46. ॐ ऋद्धिकराय नमः – जो समृद्धि प्रदान करते हैं।
47. ॐ दिव्यज्ञानदायकाय नमः – जो दिव्य ज्ञान प्रदान करने वाले हैं।
48. ॐ सद्गुरवे नमः – जो श्रेष्ठ गुरु हैं।
49. ॐ विश्वदृष्टये नमः – जो समस्त विश्व को देखने वाले हैं।
50. ॐ दुष्टदमनाय नमः – जो दुष्टों का दमन करते हैं।
51. ॐ अहंकारनाशकाय नमः – जो अहंकार का नाश करने वाले हैं।
52. ॐ सर्वविघ्ननाशकाय नमः – जो समस्त विघ्नों का नाश करने वाले हैं।
53. ॐ समर्पणप्रियाय नमः – जो पूर्ण समर्पण स्वीकार करते हैं।
54. ॐ शांतिदायकाय नमः – जो शांति प्रदान करते हैं।
55. ॐ अशरण्यशरण्याय नमः – जो निराश्रितों को आश्रय देते हैं।
56. ॐ भक्तहृदयानन्दाय नमः – जो भक्तों के हृदय में आनंद भरते हैं।
57. ॐ संकटमोचनाय नमः – जो संकटों से मुक्त करने वाले हैं।
58. ॐ दुरितनाशकाय नमः – जो समस्त पापों का नाश करते हैं।
59. ॐ मंगलमूर्तये नमः – जो मंगलमय मूर्ति हैं।
60. ॐ त्रिगुणात्मने नमः – जो सत्व, रजस और तम तीनों गुणों के स्वामी हैं।
61. ॐ चिदानंदाय नमः – जो चिदानंद स्वरूप हैं।
62. ॐ सर्वमंगलाय नमः – जो समस्त मंगल के दाता हैं।
63. ॐ भक्तप्रियाय नमः – जो अपने भक्तों को अत्यंत प्रिय हैं।
64. ॐ ज्ञानविज्ञानरूपिणे नमः – जो ज्ञान और विज्ञान के स्वरूप हैं।
65. ॐ ईश्वराय नमः – जो समस्त शक्तियों के नियंता हैं।
66. ॐ अद्वैतानंदाय नमः – जो अद्वैत आनंद स्वरूप हैं।
67. ॐ सर्वेशाय नमः – जो सबके स्वामी हैं।
68. ॐ ज्योतिर्मयाय नमः – जो दिव्य प्रकाश से परिपूर्ण हैं।
69. ॐ महासिद्धाय नमः – जो समस्त सिद्धियों के स्वामी हैं।
70. ॐ कष्टहर्त्रे नमः – जो समस्त कष्टों का हरण करने वाले हैं।
71. ॐ संसारसागर उद्धारकाय नमः – जो संसार-सागर से उद्धार करने वाले हैं।
72. ॐ आयुर्वर्धनाय नमः – जो आयु की वृद्धि करने वाले हैं।
73. ॐ धनप्रदायकाय नमः – जो धन-वैभव के दाता हैं।
74. ॐ वैभवदायकाय नमः – जो समृद्धि प्रदान करने वाले हैं।
75. ॐ सत्यप्रतिज्ञाय नमः – जो अपनी प्रतिज्ञा में सदा सत्य रहते हैं।
76. ॐ धर्मसंस्थापकाय नमः – जो धर्म की स्थापना करने वाले हैं।
77. ॐ लयस्थाय नमः – जो संपूर्ण ब्रह्मांड को अपने में लय कर सकते हैं।
78. ॐ ब्रह्मरूपाय नमः – जो ब्रह्म के स्वरूप हैं।
79. ॐ तपस्विदायकाय नमः – जो तपस्वियों को बल प्रदान करने वाले हैं।
80. ॐ सत्यज्ञानाय नमः – जो शुद्ध सत्य और ज्ञान के स्वरूप हैं।
81. ॐ भक्तानुग्रहकारिणे नमः – जो भक्तों पर कृपा करने वाले हैं।
82. ॐ विश्वचेतनाय नमः – जो समस्त विश्व में चेतना का संचार करते हैं।
83. ॐ संकटहारकाय नमः – जो संकटों को हरने वाले हैं।
84. ॐ सर्वलोकेशाय नमः – जो समस्त लोकों के स्वामी हैं।
85. ॐ कर्त्रे नमः – जो सृष्टि के कर्ता हैं।
86. ॐ धर्मपालकाय नमः – जो धर्म के रक्षक हैं।
87. ॐ सर्वगुणसंपन्नाय नमः – जो सभी गुणों से संपन्न हैं।
88. ॐ निरहंकाराय नमः – जो अहंकार रहित हैं।
89. ॐ कालजिताय नमः – जो काल पर विजय प्राप्त करने वाले हैं।
90. ॐ मृत्युंजयाय नमः – जो मृत्यु को भी पराजित करने वाले हैं।
91. ॐ कामनापूरकाय नमः – जो भक्तों की कामनाओं को पूर्ण करने वाले हैं।
92. ॐ दुःखहर्त्रे नमः – जो समस्त दुःखों का नाश करने वाले हैं।
93. ॐ अभयप्रदायकाय नमः – जो भय का नाश कर अभय प्रदान करते हैं।
94. ॐ अद्वैतानंदाय नमः – जो अद्वैत आनंद स्वरूप हैं।
95. ॐ करुणासागराय नमः – जो दया के अथाह सागर हैं।
96. ॐ संतुष्टाय नमः – जो स्वयं संतोषस्वरूप हैं।
97. ॐ निर्विकाराय नमः – जो विकारों से रहित हैं।
98. ॐ कृतज्ञाय नमः – जो सदैव कृतज्ञता को महत्व देते हैं।
99. ॐ शक्तिदायकाय नमः – जो शक्ति का संचार करने वाले हैं।
100. ॐ विजयप्रदायकाय नमः – जो विजय दिलाने वाले हैं।
101. ॐ पापविनाशकाय नमः – जो समस्त पापों का नाश करने वाले हैं।
102. ॐ श्रेयस्कराय नमः – जो जीवन में श्रेय (श्रेष्ठता) प्रदान करते हैं।
103. ॐ सौभाग्यदायकाय नमः – जो सौभाग्य के दाता हैं।
104. ॐ ब्रह्मविद्यादायकाय नमः – जो ब्रह्मविद्या का ज्ञान देने वाले हैं।
105. ॐ विवेकप्रदायकाय नमः – जो विवेक का संचार करने वाले हैं।
106. ॐ श्रीमद्भगवते नमः – जो समस्त श्री (वैभव) के स्वामी हैं।
107. ॐ प्रेममूर्तये नमः – जो प्रेम के प्रतीक हैं।
108. ॐ परमानंदाय नमः – जो परमानंद स्वरूप हैं।
नामावली जप विधि
प्रातःकाल स्नान करके शुद्ध मन से भगवान दिव्यानंद का स्मरण करें।दीप जलाकर 108 नामों का श्रद्धा सहित उच्चारण करें।प्रत्येक नाम के बाद "नमः" अवश्य कहें।
आरंभ और अंत में तीन बार निम्न श्लोक बोलना शुभ होता है:
"ॐ शांतिः शांतिः शांतिः"
विशेष लाभ:
भगवान दिव्यानंद के इन 108 पावन नामों के जप से:
✅ मन को शांति प्राप्त होती है।
✅ आत्मबल, साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
✅ नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
✅ भौतिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार की सफलता प्राप्त होती है।
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