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भगवान हनुमानजी का जन्म और प्रभु श्रीराम के प्रति भक्ति

आज हम प्रभु श्री राम के महान भक्त परमपूज्य श्री हनुमानजी कि जन्म कथा एवं उनका प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य भक्ति का यथासंभव अपनी योग्यतानुसार वर्णन करने कि कोशिश कर रहा हूँ जिसे हमने चार अध्यायों में विभाजित किया है ,जो इसप्रकार है :-  अध्याय 1: दिव्य उत्पत्ति — अंजना और केसरी का तप तथा वायुदेव का वरदान 1.1 अंजना का शाप और उसकी मुक्ति की प्रतिज्ञा प्राचीन काल में स्वर्गलोक की एक परम सुंदरी अप्सरा, पुंजिकस्थला, अपने सौंदर्य और चंचलता के कारण विख्यात थी। एक दिन उन्होंने ध्यानमग्न एक ऋषि का उपहास कर दिया। ऋषि ने उन्हें शाप दिया कि उन्हें वानरी योनि में जन्म लेना होगा। पुंजिकस्थला ने क्षमा याचना की, तब ऋषि ने कहा -"जब तुम तप कर एक ऐसे पुत्र को जन्म दोगी जो जगत का उद्धार करेगा, तभी इस शाप से मुक्ति मिलेगी।" यह शाप केवल दंड नहीं था; यह एक दिव्य लीला की भूमिका थी। ब्रह्मांड की चेतना जानती थी कि आनेवाले समय में धर्म के पुनर्स्थापन हेतु एक ऐसे वीर की आवश्यकता होगी जो अतुलनीय शक्ति, भक्ति और बुद्धि से युक्त हो। 1.2 वानरराज केसरी और अंजना का तप वानरराज केसरी, जो पर्वतराज सुमेरु के समीप...
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अश्विनी कुमार : दिव्य चिकित्सक और अमर वैद्य की गाथा

"अश्विनी कुमार" भारतीय पुराणों के अद्भुत पात्र हैं , वे न केवल दिव्य वैद्य (चिकित्सक) कहे जाते हैं, बल्कि आयुर्वेद और चिकित्सा विज्ञान के आदि आचार्य भी माने जाते हैं,आयें आज हम उन महान विभूति के बारे में कुछ महत्त्वपूर्ण जानकारी हासिल करते हैं।   प्रस्तावना भारतीय संस्कृति में जब भी चिकित्सा विज्ञान, आरोग्य और जीवनरक्षा की बात आती है, तो सबसे पहले जिन दिव्य व्यक्तित्वों का स्मरण होता है, वे हैं – अश्विनी कुमार। वे न केवल आयुर्वेद के आद्य आचार्य कहे जाते हैं, बल्कि देवताओं के वैद्य भी रहे। अश्विनी कुमार एक नहीं, बल्कि जुड़वा भाई थे -नासत्य और दस्र। इनके कार्य, गुण, और तपस्विता ने इन्हें ऋग्वेद से लेकर महाभारत तक अमर कर दिया। उनकी कथाएँ, चिकित्सा संबंधी चमत्कार और लोककल्याण के अद्भुत प्रयास आज भी प्रेरणा देते हैं। आइए, इस अद्भुत युगल की विस्तृत कथा में प्रवेश करें। 1. अश्विनी कुमारों का परिचय अश्विनी कुमार, देवताओं के वैद्य, दिव्य गुणों से युक्त, अत्यंत सुंदर, तेजस्वी और कृपालु थे। संस्कृत में 'अश्व' का अर्थ 'घोड़ा' होता है, और 'अश्विनी' का अर्थ 'घोड...

टेलीपैथी: एक गहन अन्वेषण (भाग-3)-अनुभूति से आत्मबोध की यात्रा तक

हम सबने टेलीपैथी पार्ट -2 में बहुत कुछ सीखा अब हम इसका अगला भाग प्रस्तुत कर रहे हैं जो टेलीपैथी: एक गहन अन्वेषण (भाग-3) होगा ,जिसमें हम टेलीपैथी के प्रशिक्षण विधियों, उससे जुड़े अनुभवों, साधकों की जीवन-कथाओं, वैज्ञानिक अनुसंधानों के विस्तार, तथा जाग्रत चेतना की भूमिकाओं को और भी गहराई से समझेंगे।तो आयें अब हम अगला भाग-3 देखते हैं ।  1. टेलीपैथी का प्रशिक्षण: साधना से सिद्धि तक टेलीपैथी कोई चमत्कार नहीं, बल्कि एक विधिपूर्वक अर्जित की जाने वाली मानसिक साधना है। जैसे संगीत, योग या चित्रकला में अभ्यास आवश्यक होता है, वैसे ही टेलीपैथी में भी अनुशासित प्रशिक्षण और मानसिक संतुलन की आवश्यकता होती है। a. प्रारंभिक अभ्यास: 1. मौन ध्यान (Silent Meditation): प्रतिदिन 20-30 मिनट मौन ध्यान, जिसमें साधक अपनी श्वास और विचारों पर केंद्रित रहता है, मस्तिष्क की तरंगों को शांत करता है। 2. एकाग्रता अभ्यास (Concentration Training): एक बिंदु (जैसे मोमबत्ती, तिलक, जल की बूँद) पर स्थिर दृष्टि रखकर अभ्यास करने से मानसिक क्षमताएँ जाग्रत होती हैं। 3. मन-चित्रण (Visualization): किसी व्यक्ति का चेहरा, उसकी भाव-...

टेलीपैथी: एक गहन अन्वेषण (भाग-2)

पिछले भाग के अंश: पिछले भाग में हम सबने टेलीपैथी क्या है, कितने प्रकार के होते हैं, क्या महत्व है आदि कि जानकारी प्राप्त किया, अब उसके अगले भाग में चलते हैं और कुछ नया सीखने कि कोशिश करते हैं। 1 . टेलीपैथी का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य टेलीपैथी कोई नया या आधुनिक विचार नहीं है। इसके प्रमाण हमें प्राचीन सभ्यताओं और ग्रंथों में भी मिलते हैं। वैदिक काल, मिस्र, चीन और यूनानी दर्शन में ऐसे अनेक उल्लेख मिलते हैं, जहाँ मुनियों, संतों या साधकों द्वारा विचारों के आदान-प्रदान की क्षमता का वर्णन है। a. भारत में टेलीपैथी का इतिहास: ऋषि-मुनियों के काल में टेलीपैथी को 'संकेत भाषा' या 'मनसंवाद' के रूप में जाना जाता था। महाभारत में विदुर, संजय और वेदव्यास जैसे पात्रों में ऐसी क्षमताएँ दर्शाई गई हैं। संजय ने धृतराष्ट्र को युद्ध का आँखों-देखा हाल सुनाया, वह भी मीलों दूर से — यह टेलीपैथी का ही उदाहरण माना जाता है। b. अन्य संस्कृतियों में: मिस्र की पिरामिड सभ्यता में ‘आकाशीय संवाद’ का उल्लेख है। ताओ धर्म, बौद्ध परंपरा और ईसा मसीह के समय के कुछ चमत्कारी घटनाओं को भी टेलीपैथी से जोड़ा गया है। 2. ध...

Loshu Grid: एक विस्तृत विश्लेषण

परिचय: Loshu Grid (लौशु ग्रिड) एक प्राचीन चीनी अंक ज्योतिष प्रणाली है, जो संख्याओं के माध्यम से व्यक्ति के जीवन, व्यक्तित्व और भविष्य को समझने का एक सशक्त उपकरण है। यह अंक विज्ञान की सबसे प्रभावी विधियों में से एक मानी जाती है। इस ग्रिड का उपयोग जीवन के विभिन्न पहलुओं की व्याख्या करने, जीवन की ऊर्जा को संतुलित करने और भाग्य को समझने के लिए किया जाता है। यह प्रणाली मुख्य रूप से पायथागोरियन अंकशास्त्र से प्रभावित मानी जाती है। Loshu Grid का इतिहास और उत्पत्ति Loshu Grid की उत्पत्ति प्राचीन चीन से मानी जाती है। एक किंवदंती के अनुसार, हज़ारों साल पहले, लुओ नदी (Lo River) के किनारे एक कछुआ देखा गया, जिसकी पीठ पर एक विशेष प्रकार का अंक संयोजन उकेरा हुआ था। इस आकृति को ध्यानपूर्वक देखने पर एक जादुई संख्यात्मक ग्रिड प्रकट हुआ, जिसे "लौशु स्क्वायर" कहा गया। यह 3x3 ग्रिड का एक स्वरूप था, जिसमें 1 से 9 तक की संख्याएँ इस प्रकार व्यवस्थित थीं कि प्रत्येक पंक्ति, स्तंभ और विकर्ण (diagonal) का योग 15 आता था। यह संख्या चीन में सौभाग्य और संतुलन का प्रतीक मानी जाती है। यह ग्रिड इस प्रकार संतु...

कुआ अंक (Kua Number )का प्रभाव और महत्व

कुआ अंक का प्रभाव और महत्व कुआ अंक (Kua Number) मुख्य रूप से फेंगशुई (Feng Shui) और वास्तुशास्त्र में उपयोग किया जाता है। यह अंक किसी व्यक्ति की अनुकूल दिशाओं, ऊर्जा संतुलन और भाग्य को निर्धारित करने में मदद करता है। इसे पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग तरीकों से निकाला जाता है। कुआ अंक का प्रभाव कुआ अंक का उपयोग यह जानने के लिए किया जाता है कि कौन-सी दिशाएँ व्यक्ति के लिए शुभ हैं और कौन-सी अशुभ। इसे आठ घरों के सिद्धांत (Eight Mansions Theory) के आधार पर विभाजित किया जाता है। कुआ अंक को दो मुख्य समूहों में बाँटा गया है : 1. पूर्व समूह (East Group) – कुआ अंक: 1, 3, 4, 9 2. पश्चिम समूह (West Group) – कुआ अंक: 2, 5, 6, 7, 8 कुआ अंक के अनुसार शुभ और अशुभ दिशाएँ कुआ अंक के लाभ और उपयोग 1. शुभ दिशाओं का प्रयोग: घर का मुख्य द्वार, सोने का स्थान और कार्य करने की दिशा शुभ होनी चाहिए। बैठने और सोने की दिशा कुआ अंक की शुभ दिशा में रखने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। 2. अशुभ दिशाओं से बचाव: अशुभ दिशाओं में अधिक समय बिताने से नकारात्मकता और समस्याएँ बढ़ सकती हैं। अशुभ दिशा में यदि घर है,...

मूलांक, भाग्यांक, धनांक और कुआ अंक: विस्तृत विश्लेषण

अंक ज्योतिष (Numerology) एक प्राचीन विज्ञान है, जो यह मानता है कि संख्याएँ हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव डालती हैं। जन्म तिथि और अन्य संख्याओं के आधार पर व्यक्ति के जीवन की दिशा, उसके व्यक्तित्व, भाग्य, धन-संपत्ति और स्वास्थ्य का अनुमान लगाया जा सकता है। अंक ज्योतिष में चार प्रमुख संख्याएँ होती हैं: मूलांक, भाग्यांक, धनांक और कुआ अंक। इस लेख में इन सभी अंकों की गणना की विधि और उनका विस्तृत विश्लेषण दिया गया है। 1.मूलांक (Birth Number ) कैसे निकालें? मूलांक व्यक्ति की जन्म तारीख के आधार पर निकाला जाता है। यदि जन्म तारीख एक अंकीय (single digit) है, तो वही मूलांक होता है। यदि यह दो अंकों में है, तो दोनों अंकों को जोड़कर एक अंक में परिवर्तित कर दिया जाता है। उदाहरण: जन्म 4 तारीख को हुआ है → मूलांक 4। जन्म 14 तारीख को हुआ है → 1 + 4 = 5 (मूलांक 5)। जन्म 29 तारीख को हुआ है → 2 + 9 = 11, और 1 + 1 = 2 (मूलांक 2)। 2. भाग्यांक (Life Path Number) कैसे निकालें? भाग्यांक व्यक्ति की पूरी जन्मतिथि (DD/MM/YYYY) के अंकों का योग करने से प्राप्त होता है। उदाहरण: 25-07-1992 → 2 + 5 + 0 + 7 + 1 + 9...